लाल बत्ती को लेकर क्या हैं नियम ?
अप्रैल 2017 में मोदी कैबिनेट ने सेंट्रल मोटर वाहन एक्ट 1989 में बदलाव को मंजूरी दी।
इस नियम के 108 (1) (3) में था कि 'केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें ये तय करेंगी कि - किन गाड़ियों पर लाल और नीली बत्ती लग सकती है'।
कैबिनेट ने इस एक्ट की ऊपर लिखी
इन लाइनों को ही खत्म कर दिया।
यानी केन्द्र-राज्य सरकारों की उस पॉवर को ही खत्म कर दिया गया, जिसके तहत वीआईपी को लाल बत्ती लगाने की अनुमति थी।
दिसम्बर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में सरकार को निर्देश दिया था कि लालबत्ती के दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं।
बदलाव के बाद
1 मई 2017 को नोटिफिकेशन जारी हुआ और गाड़ियों पर लाल बत्ती के यूज पर बैन लग गया।
नए नियमों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री भी लाल बत्ती नहीं लगा सकते।
जिन्हें गाड़ियों पर लाइट लगाने की छूट है वे केवल मल्टीकलर (लाल, नीली, सफेद) लाइट का यूज करेंगे।
गाड़ी पर मल्टीकलर लाइट भी तभी लगेगी जब वह तय ड्यूटी की कैटेगरी में आती हो।
कौन-कौन कर सकता 'मल्टीकलर लाइट का यूज
फायर ब्रिगेड की सर्विसेज ।
पुलिस, डिफेंस व पैरामिलिट्री फोर्सेज, लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने के लिए।
प्राकृतिक आपदा (भूकंप, बाढ़, लैंड स्लाइड, साइक्लोन, सुनामी, मैनमेड डिजास्टर) आदि में।
सेंट्रल और स्टेट ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट हर साल मल्टीकलर यूज करने वाली गाड़ियों की लिस्ट जारी करेगा।